#लखनऊ
#तारा_वाली_कोठी
दो -तीन दिन पहले जरूरी काम से स्टेट बैंक की मेन ब्रांच में जाना हुआ , ब्रांच के बाहर लगा पत्थर " तारा वाली कोठी " देख कर जानने की उत्सुकता हुई मालूम किया किताबे खंगाली तो "तारा वाली कोठी " का इतिहास मिला ।
अवध के नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वितीय को ज्योतिष से बड़ा लगाव था जिसने उन्हें खगोल शास्त्र की तरफ आकृष्ट किया इसीलिए उन्होंने एक उच्च कोटि की वेधशाला का निर्माण करवाया जो "तारा वाली कोठी" के नाम से मशहूर हुई । यह फ्रांस के प्रसिद्ध स्थापत्य के नमूने पर बना चौकोर भवन है ।
इस वेधशाला के लिए नवाब ने विदेशों से बड़ी-बड़ी दूरबीनें और खगोल यंत्र मंगवाए और कर्नल वेलकावस को प्रमुख खगोल शास्त्री नियुक्त किया गया । नवाब नसीरुद्दीन हैदर की मृत्यु के बाद 1847 तक यह वेधशाला चलती रही पर 1847 में कर्नल साहब की मृत्यु के बाद नवाब वाजिद अली शाह ने उनकी जगह कोई दूसरा खगोल विज्ञानी नियुक्त नही किया । और कीमती यंत्र और दूरबीनें बेकार पड़ी रही ।
1857 की क्रांति में मौलवी अहमदउल्ला शाह ने तारा वाली कोठी को अपना ठिकाना बनाया और यहीं से पूरे युद्ध का संचालन किया । इसी आपाधापी में दूरबीनें और यंत्र या तो गायब हो गए या युद्ध की भेंट चढ़ गए ।
बाद में इसी इमारत में इम्पीरियल बैंक खुला जो आजादी के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की लखनऊ की मुख्य शाखा है ।
निशिकान्त
#तारा_वाली_कोठी
दो -तीन दिन पहले जरूरी काम से स्टेट बैंक की मेन ब्रांच में जाना हुआ , ब्रांच के बाहर लगा पत्थर " तारा वाली कोठी " देख कर जानने की उत्सुकता हुई मालूम किया किताबे खंगाली तो "तारा वाली कोठी " का इतिहास मिला ।
अवध के नवाब नसीरुद्दीन हैदर द्वितीय को ज्योतिष से बड़ा लगाव था जिसने उन्हें खगोल शास्त्र की तरफ आकृष्ट किया इसीलिए उन्होंने एक उच्च कोटि की वेधशाला का निर्माण करवाया जो "तारा वाली कोठी" के नाम से मशहूर हुई । यह फ्रांस के प्रसिद्ध स्थापत्य के नमूने पर बना चौकोर भवन है ।
इस वेधशाला के लिए नवाब ने विदेशों से बड़ी-बड़ी दूरबीनें और खगोल यंत्र मंगवाए और कर्नल वेलकावस को प्रमुख खगोल शास्त्री नियुक्त किया गया । नवाब नसीरुद्दीन हैदर की मृत्यु के बाद 1847 तक यह वेधशाला चलती रही पर 1847 में कर्नल साहब की मृत्यु के बाद नवाब वाजिद अली शाह ने उनकी जगह कोई दूसरा खगोल विज्ञानी नियुक्त नही किया । और कीमती यंत्र और दूरबीनें बेकार पड़ी रही ।
1857 की क्रांति में मौलवी अहमदउल्ला शाह ने तारा वाली कोठी को अपना ठिकाना बनाया और यहीं से पूरे युद्ध का संचालन किया । इसी आपाधापी में दूरबीनें और यंत्र या तो गायब हो गए या युद्ध की भेंट चढ़ गए ।
बाद में इसी इमारत में इम्पीरियल बैंक खुला जो आजादी के बाद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की लखनऊ की मुख्य शाखा है ।
निशिकान्त

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