#लखनऊ
नवाब आसिफुद्दौला के एक दीवान राजा टिकैत राय थे । जाति के कायस्थ राजा टिकैत राय बहुत धर्म परायण थे । उन्होंने टिकैत गंज में शीतला देवी के मंदिर के निकट एक भव्य तालाब बनवाया जो कि लखौड़ी ईंट का बना वर्गाकार सीढ़ी नुमा तालाब था । इस पर स्त्रियों के नहाने के लिए अलग पर्देदार घाट बना था । इसी के किनारे लखनऊ के प्रसिद्ध आठों का मेला लगता था । जो शायद अब भी लगता है , पर नवाबों के समय में उस मेले की बात ही और थी , उसका विवरण इतिहास में है । कई इतिहासकारों ने आठों मेले के बारे में लिखा है । बड़े बड़े नवाब पालकियों में बैठ कर आते थे तालाब के किनारे जन मनोरंजन का इंतजाम होता था ।
बड़ा अफसोस होता है इस तालाब को देख कर 1985 -86 में यह तालाब कुछ ठीक हालत में था मैंने उस समय इसको इसके मूल रूप में देखा था । जिसमे भले ही गन्दा पानी था पर पानी था । तालाब का मूल स्वरूप बरकरार था । अब तालाब तो नही रहा वह , कोई भी पुरानी फोटो नही मिली अफसोस ।
निशिकान्त
नवाब आसिफुद्दौला के एक दीवान राजा टिकैत राय थे । जाति के कायस्थ राजा टिकैत राय बहुत धर्म परायण थे । उन्होंने टिकैत गंज में शीतला देवी के मंदिर के निकट एक भव्य तालाब बनवाया जो कि लखौड़ी ईंट का बना वर्गाकार सीढ़ी नुमा तालाब था । इस पर स्त्रियों के नहाने के लिए अलग पर्देदार घाट बना था । इसी के किनारे लखनऊ के प्रसिद्ध आठों का मेला लगता था । जो शायद अब भी लगता है , पर नवाबों के समय में उस मेले की बात ही और थी , उसका विवरण इतिहास में है । कई इतिहासकारों ने आठों मेले के बारे में लिखा है । बड़े बड़े नवाब पालकियों में बैठ कर आते थे तालाब के किनारे जन मनोरंजन का इंतजाम होता था ।
बड़ा अफसोस होता है इस तालाब को देख कर 1985 -86 में यह तालाब कुछ ठीक हालत में था मैंने उस समय इसको इसके मूल रूप में देखा था । जिसमे भले ही गन्दा पानी था पर पानी था । तालाब का मूल स्वरूप बरकरार था । अब तालाब तो नही रहा वह , कोई भी पुरानी फोटो नही मिली अफसोस ।
निशिकान्त
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