#लखनऊ
सन 1870 में विजयनगरम के महाराजा कृष्णदेव राय ने लखनऊ में एक मेडिकल कालेज खोलने की सोची लेकिन धन की कमी के कारण यह न हो सका । सन 1905 में प्रिंस ऑफ वेल्स भारत यात्रा के समय 21 दिसम्बर 1905 को मेडिकल कालेज की नींव रखी गई ।
इसके लिए जहांगीराबाद के राजा सर तसदुक रसूल ने अयोध्या के राजा की मदद से प्रयास किये थे ।
इसका निर्माण सिरेनिक शैली में किया गया , इमारत तैयार होने के बाद इसका शुभारंभ किंग जार्ज पंचम औऱ क्वीन मेरी के भारत आने के अवसर पर किया गया और किंग के नाम पर ही इसका नाम " किंग जार्ज मेडिकल कालेज " रखा गया ।
अक्टूबर 1911 में यहाँ 31 छात्रों का पहला बैच शुरू किया गया , कर्नल डब्ल्यू सेल्बी, मेडिकल कालेज के पहले प्रिंसपल बने , 5 प्रोफेसर और 2 लेक्चरर के साथ यहाँ पढ़ाई शुरू हुई और 1916 में पहला बैच यहाँ से पास होकर निकला ।
साल 1921 में लखनऊ यूनिवर्सिटी की शुरुवात के बाद " किंग जार्ज मेडिकल कालेज" को लखनऊ यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध कर दिया गया , उसी वर्ष यहाँ 226 बेड का एक अस्पताल खोला गया जिसका नाम " किंग जार्ज हॉस्पिटल" रखा गया लखनऊ यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद मेडिकल कालेज का दीक्षांत समारोह 1922 में रखा गया जिसमें कलकत्ता के तत्कालीन वाइस चांसलर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया ।
साल 1931 में क्वीन मेरी हॉस्पिटल और 1949 में डेंटल फेकल्टी की शुरुवात हुई ।
तमाम उतार- चढावों के बाद आज यह देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कालेजों में से एक है । यहाँ पढ़ने वाले "जार्जियन" कहलाते हैं
निशिकान्त
सन 1870 में विजयनगरम के महाराजा कृष्णदेव राय ने लखनऊ में एक मेडिकल कालेज खोलने की सोची लेकिन धन की कमी के कारण यह न हो सका । सन 1905 में प्रिंस ऑफ वेल्स भारत यात्रा के समय 21 दिसम्बर 1905 को मेडिकल कालेज की नींव रखी गई ।
इसके लिए जहांगीराबाद के राजा सर तसदुक रसूल ने अयोध्या के राजा की मदद से प्रयास किये थे ।
इसका निर्माण सिरेनिक शैली में किया गया , इमारत तैयार होने के बाद इसका शुभारंभ किंग जार्ज पंचम औऱ क्वीन मेरी के भारत आने के अवसर पर किया गया और किंग के नाम पर ही इसका नाम " किंग जार्ज मेडिकल कालेज " रखा गया ।
अक्टूबर 1911 में यहाँ 31 छात्रों का पहला बैच शुरू किया गया , कर्नल डब्ल्यू सेल्बी, मेडिकल कालेज के पहले प्रिंसपल बने , 5 प्रोफेसर और 2 लेक्चरर के साथ यहाँ पढ़ाई शुरू हुई और 1916 में पहला बैच यहाँ से पास होकर निकला ।
साल 1921 में लखनऊ यूनिवर्सिटी की शुरुवात के बाद " किंग जार्ज मेडिकल कालेज" को लखनऊ यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध कर दिया गया , उसी वर्ष यहाँ 226 बेड का एक अस्पताल खोला गया जिसका नाम " किंग जार्ज हॉस्पिटल" रखा गया लखनऊ यूनिवर्सिटी की स्थापना के बाद मेडिकल कालेज का दीक्षांत समारोह 1922 में रखा गया जिसमें कलकत्ता के तत्कालीन वाइस चांसलर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया ।
साल 1931 में क्वीन मेरी हॉस्पिटल और 1949 में डेंटल फेकल्टी की शुरुवात हुई ।
तमाम उतार- चढावों के बाद आज यह देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कालेजों में से एक है । यहाँ पढ़ने वाले "जार्जियन" कहलाते हैं
निशिकान्त

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